Valley of Flowers Yaatra Gaid 2025 Maansoon Mein Kya Dekhen, Kaise Pahunche?| Valley of Flowers यात्रा गाइड 2025 : मानसून में क्या देखें, कैसे पहुंचे?

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                       वैली ऑफ फ्लावर्स उत्तराखंड राज्य के चमोली में स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है और समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 3,658 मीटर है | यह अनेक प्रकार के फूलों,घास के मैदान और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के लिए जानी जाती है | यहाँ कुछ ऐसे दुर्लभ फूलों को भी देखा जा सकता है ,जिन्हें आप दुनिया में और कहीं नहीं देख सकते | यह वैली नंदा देवी पर्वत माला का एक हिस्सा है |यहाँ इस लेख में Valley of Flowers Yaatra Gaid 2025 Maansoon Mein Kya Dekhen, Kaise Pahunche? के बारे में पूरी जानकारी दी जा रही है | मानसून की पहली बूंदें जब धरती से टकराती हैं, तब इस वैली की सुन्दरता में चार चाँद लग जाते हैं | 

          अड्वेंचर के शोकीन पर्यटकों के लिए प्रकृति की गोद में बसी वैली ऑफ फ्लावर्स एक जादुई दुनिया में बदल जाती है। चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की चादर, ठंडी हवाएं, हरे-भरे पहाड़ और पिघलते बादलों का संगम – यह सब इसे मानसून के सबसे अद्भुत स्थलों में एक बनाता है। इसी खूबसूरत वातावरण का आनंद लेने के लिए पर्यटक वैली ऑफ़ फ्लावर्स की ओर आकर्षित होते हैं | यह ब्लॉग एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है, जो आपको यात्रा से पहले आवश्यक हर जानकारी देगा – इतिहास से लेकर टॉप पर्यटन स्थल, बजट, फूड और लोकल मार्केट्स तक।

 

1. वैली ऑफ फ्लावर्स का इतिहास History of Valley of Flowers Valley of Flowers Yaatra Gaid 2025 Maansoon Mein Kya Dekhen, Kaise Pahunche?

Valley of Flowers Yaatra Gaid 2025 Maansoon Mein Kya Dekhen, Kaise Pahunche?
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                      वैली ऑफ फ्लावर्स की खोज 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ और उनकी टीम ने किया था। जब वे माउंट कामेट की यात्रा से वापस होते समय रास्ता भूल गए और भटकते हुए वह इस वैली पर पहुँच गए जो विभिन्न प्रकार के फूलों से भरी हुई थी | इसकी सुंदरता और जैव विविधता ने उन्हें इतना आकर्षित किया कि उन्होंने इस घाटी का नाम  “वैली ऑफ फ्लावर्स” दिया और  इस खोज को एक किताब “Valley of Flowers” में समर्पित कर दिया। भारत सरकार द्वरा 1982 में इस वैली को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और 2005 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट की मान्यता मिली। यह घाटी 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली है और यहाँ लगभग 600 से अधिक प्रजातियों के रंग बेरंगे फूल पाए जाते हैं।

 

 2. वैली ऑफ फ्लावर्स में घूमने के लिए 10 सुंदर पर्यटन स्थल10 Beautiful                Tourist Places to Visit in Valley of Flowers

2.1 वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क Valley of Flowers National Park

Valley of Flowers Yaatra Gaid 2025 Maansoon Mein Kya Dekhen, Kaise Pahunche?
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                        वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क भारत के उत्तराखंड राज्य के चामोली में स्थित बहुत ही सुन्दर नेशनल पार्क है | 1982 में इस नेशनल पार्क की स्थापना की गई थी | यह पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं ,जहाँ जुलाई-अगस्त में फूलों का जादुई संसार दिखाई देता है। यह नेशनल पार्क अल्पाइन फूलों और अनेक प्रकार की वनस्पतियों के लिए प्रसिध्य है | इस नेशनल पार्क में ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी और कोबरा लिली जैसे दुर्लभ फूल देखे जा सकते हैं। इसके आलावा आप यहाँ अनेक प्रकार के जानवर एशियाई भालू ,हिम तेंदुआ ,कस्तूरी मृग , भूरा भालू ,लाल लोमड़ी और नीली भेड़ पाए जाते हैं | यह पार्क 8 किलोमीटर लम्बा और 2 चौड़ा है | यह हिमालय की पर्वत श्रंखलाओं बीच स्थित एक अद्भुत स्थल है | यह नेशनल पार्क जून से अक्टूबर तक खुला रहता है ,इसके आलावा बाकी समय यह बर्फ से ढका होता है |

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2.2 हेमकुंड साहिब  Hemkund Sahib: 

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                       हेमकुंड साहिब छामोली में स्थित एक सिख तीर्थ स्थल है | समुद्र तल से 4,329 मीटर की ऊँचाई पर स्थित ,यह सिखों का पवित्र स्थल धार्मिक और प्राकृतिक शांति का संगम है। यह दसवें सिख गुरु ,गुरु गोविंद सिंह को समर्पित है | यह सिखों का बहुत ही प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है ,जिसके दर्शन के लिए हर साल दूर दूर से तीर्थ यात्री आते हैं | हेमकुंड संस्कृत शब्द है ,जिसका अर्थ होता है “बर्फ का कटोरा “ | यह एक प्रकार की ग्लेशियर झील है,जो सात पर्वत चोटियों से घिरी है | यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश और बद्रीनाथ राजमार्ग पर स्थित गोविंद घाट से यात्रा शुरू की जा सकती है | गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब की दूरी 13 किलोमीटर है ,जिसमें 4 किलोमीटर की दूरी आप टैक्सी के द्वारा तय कर सकते हैं और बाकी 9 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करना पड़ता है | अक्टूबर से अप्रैल तक यह रास्ता बर्फ से ढके होने के कारण दुर्गम बना रहता है | यहां सिख यात्री मई के महीने में आते हैं | यहां हेलीकॉप्टर की भी सेवाएं दी जाती हैं,जो की गोविंद घाट और घांघरिया के बीच होती है | हेमकुंड साहिब में रात में ठहरने की अनुमती नहीं दी जाती |

2.3 घांघरिया  Ghangaria:

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                   घांघरिया यह छोटा सा बेस कैंप गांव है,जो वाले ऑफ़ फ्लावर्स और हेमकुंड साहिब के रास्ते पर स्थित है | यहाँ से वैली ऑफ फ्लावर्स और हेमकुंड साहिब के लिए ट्रेकिंग शुरू होती है। यह गांव अंतिम मानव पड़ाव  स्थल है | इस स्थान का उपयोग यात्री बेस कैंम्प के रूप में करते हैं | घांघरिया पर पुष्पावती नदी का संगम है ,जो आगे चलकर गोविन्दघाट घाट पर अलकनंदा नदी पर मिलती है | यह गाँव जून से अक्टूबर तक खुला रहता है ,बाकी दिनों में यह इलाका बर्फ से ढका रहता है | घांघरिया पहुँचने के लिए 14 से भी कम चढ़ाई करना पड़ता है | यहाँ हेलीपैड भी है ,हेलिकॉप्टर से भी यहाँ पहुँच सकते हैं | पैदल चलने के लिए साफ़ सडक नहीं है ,कुली या खच्चर के सहारे भी चढ़ सकते हैं | ट्र्रेकिंग के शौकीन लोग ट्रेक का आनंद ले सकते हैं |तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए गोविन्दघाट में बहुत कम विकल्प हैं ,घांघरिया में बहुत से स्थान हैं जहाँ यात्रियों को सभी प्रकार का भोजन उपलब्ध होता है |

2.4 जोशीमठ Joshimath:

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                 जोशीमठ धार्मिक, ऐतिहासिक और एडवेंचर का केन्द्र। यह जगह चमोली जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल है और बद्रीनाथ जाने का प्रमुख रास्ता है। कहा जाता है की स स्थान पर आदि शंकराचार्य को 8 वीं सदी में ज्ञान प्राप्त हुआ | उन्होंने यहाँ बद्रीनाथ मंदिर से पहले प्रथम मठ की स्थापना की | जोशीमठ की आध्यामिकता और संस्क्रति लोगों को प्रभावित करती हैं | यहाँ बहुत सारे स्थान हैं जहाँ लोग पूजा करते हैं ,इसी कारण यहाँ हर साल अधिक संख्या में लोग घूमने आते हैं | जोशीमठ के पास घूमने योग्य स्थानों में औलि और स्की रिसोर्ट मुख्य हैं |

 

2.5 गौरी कुंड GauriKund:

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image credit: ViacationValley of Flowers Yaatra Gaid 2025 Maansoon Mein Kya Dekhen, Kaise Pahunche?

                गौरी कुंड उत्तराखंड में स्थित हिन्दुओं का एक और तीर्थ स्थल है | समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 6502 फिट है | गौरीकुंड केदारनाथ मंदिर जाने वालों के लिए आधार शिविर का काम करता है | यह एक बहुत ही सुंदर और मनमोहक छोटी सी झील के आकार में है | इसके पास ही एक गर्म पानी का झरना है, जिसे अब स्नानागार के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है | कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां पार्वती जी ने अपने पुत्र गणेश को अपने हाथों से बनाया था और शिव जी ने उस का सिर काट दिया था | जिससे पार्वती जी क्रोधित होकर शिव जी को इस बच्चे को जीवित करने के लिए कहा था ,तब शिव जी ने एक हाथी का सर काट कर इस बच्चे के शरीर पर लगा कर पुनर्जीवित कर दिया था |

2.6 बद्रीनाथ मंदिर Badrinath Temple:

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              बद्रीनाथ मंदिर भारत के सबसे पुराने और प्रमुखधर्म स्थलों में से एक है | यह मंदिर हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है | यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है | यह मंदिर अलकनंदा नदी के पास गढ़वाल पहाड़ियों में10 279 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक प्रमुख चारधाम, जहाँ आप मानसून में भी पहुँच सकते हैं। यहाँ की घाटियाँ और अलकनंदा नदी बहुत खूबसूरत दिखती हैं। यहां बर्फ से ढकी पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता एक अद्भुत ही नजारा पेश करती हैं,जिन से प्रभावित होकर देश भर से पर्यटक इसकी ओर आकर्षित होते हैं | बद्रीनाथ मंदिर भारत में सबसे अधिक देखे जाने वाले तीर्थ स्थलों में से एक है | यहां बहुत अधिक संख्या में पर्यटक दर्शन करने के लिए आते हैं |

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2.7 नंदा देवी नेशनल पार्क Nandadevi National Park:

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             नंदा देवी नेशनल पार्क उत्तराखंड का एक बहुत खोबसूरत राष्ट्रीय उद्धान और पर्यटन स्थल है | यह उद्धान 7816 मीटर की ऊंचाई पर नंदा देवी पर्वत के आस पास के इलाके में स्थित 630 वर्ग किलोमीटर पर फैला है | सन 1982 में इसे राष्ट्रिय उद्धान घोषित किया गया एवं सन 1988 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया है | 

                   यह वैली ऑफ फ्लावर्स के साथ UNESCO साइट में शामिल है। इस अभ्यारण को दो भागों में बनता गया है ,भीतरी और बहरी | यहाँ ट्रेकिंग और वन्य जीवन प्रेमियों के लिए बहुत कुछ है। नंदा देवी नेशनल पार्क में पक्षियों की लगभग 130 प्रजातियाँ पाई जाती हैं | इसके आलावा यहाँ अनेक प्रकार की तितलियाँ और मकड़ियाँ भी पाई जाती हैं | जानवरों में हिमालयी भालू ,हिमालयी ताहर ,कस्तूरी मृग ,लंगूर ,गोरल ,तेंदुआ ,लाल लोमड़ी आदि पाए जाते हैं |यहाँ के लुभावने दृश्य और वनस्पतियाँ पर्यटकों का मन मोह लेती हैं ,यही कारण है की अधिक संख्या में पर्यटक इसकी ओर आकर्षित होते हैं |

2.8 लक्ष्मण गंगा नदी Lakshman Ganga River:

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                 यह नदी यात्रा मार्ग में पड़ती है और अपने साफ पानी और झरनों के लिए जानी जाती है।लक्ष्मण गंगा नदी हेमकुंड साहिब से निकलती है और समुद्र ताल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | यह नदी हिन्दू धर्म के अनुसार बहुत अधिक महत्त्व रखती है | इस नदी का उल्लेख हिन्दू धर्म ग्रंथों और पुराणिक कथाओं में इसका उल्लेख मिलता है |लक्ष्मण गंगा नदी अलकनंदा नदी की सहायक नदी है ,जो आगे चलकर भागीरथी नदी के साथ मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है | ट्रेकिंग के शोकीन पर्यटकों का यह पसंदीदा स्थल है | पर्यटक यहाँ चुनोतिपूर्ण रास्तों से ट्रेकिंग कर पहुँच सकते हैं ,जो की उनके लिए बहुत ही रोमांचक होता है |

2.9 औलि  Auli:

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                   औलि हिमालय की चोटी में स्थित बहुत खूबसूरत और मनोरम हिल स्टेशन है | यह समुद्र ताल से 2,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है | जनवरी से मार्च तक बर्फीले महीनों में यह स्थान स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसे रोमांचकारी शीतकालीन खेलों के लिए प्रसिद्ध है | यहं स्थित रोपवे एशिया की दूसरी सबसे ऊंची और सबसे लम्बी केबल कार है | यह केबल कार जोशीमठ और औलि के बीच 4 किलोमीटर लम्बी केबल कार है | यहाँ देवदार के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं ,जिसकी ताज़ी खुशबु आप यहाँ की हवा में महसूस कर सकते हैं | प्रकृति ने यहाँ के दृश्यों को बहुत ही ख़ूबसूरती से सजाया है | गर्मियों के दिनों में जब बर्फ पिघल जाती है, तब बहुत सी सुन्दर घास के मैदान दिखाई देते हैं | एडवेंचर के शोकीन लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है | पर्यटक यहाँ प्राकृतिक सुन्दरता का आनंद लेने के लिए अधिक संख्या में आते हैं |

2.10 माणा गांव Mana Village:

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                   फूलों की घाटी में घूमने जाएँ तो माणा गाँव अवश्य जाएं | यह तिब्बत की सीमा से 26 किलोमीटर की दूरी में स्थित एक बहुत सुन्दर छोटा सा गाँव है | बद्रीनाथ से इसकी दूरी 3 किलोमीटर है | इस गाँव में रहने वाले लोगों को भोटिया कहा जाता है ,जो इंडो मंगोलियन जनजाति से सम्बंधित हैं | इस गाँव में अलकनंदा और सरस्वती नदी का संगम है | यह गाँव 3219 मीटर ऊंचाई पर स्थित हिमालय की खूबसूरत बर्फीली पहाड़ियों से घिरा भारत का अंतिम गाँव है | यहाँ के लोग छोटी छोटी झोपड़ियों में रहते हैं जोकि सुन्दर तरीके से सजी होती हैं | यहं की हाथ से बनी वस्तुएं बहुत प्रसिद्ध हैं | इन वस्तुओं में मुख्य रूप से ऊनी वस्त्र शाल ,टोपी ,मफलर ,आसन ,कंबल आदि |

 

3. वैली ऑफ फ्लावर्स में घूमने का सही समय Best time to visit Valley of Flowers

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                          वैली ऑफ फ्लावर्स में घूमने का सही समय जुलाई से सितंबर के बीच है। जुलाई महीने यहाँ कम बारिश होती है एवं भीड़ भी कम होती है ,इसलिए यहाँ ट्रेकिंग करना आसन होता है | जुलाई के आखरी सप्ताह में घाटी में फूल खिलना शुरू हो जाते हैं | अगस्त के पहले 15 दिनों में घाटी पूरी तरह फूलों से भर जाती है | यही सबसे अच्छा समय होता है जब फूल अपनी पूरी रंगत में होते हैं और मानसून की हरियाली इसे स्वर्ग बना देती है। सितम्बर में फूल मुरझाने लगते हैं ,परन्तु यहाँ की हरियाली और ख़ूबसूरती में कोई कमी नहीं आती | इस माह में बारिश समाप्त होने लगती है | यह समय ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त है |

 

4. वैली ऑफ फ्लावर्स कैसे पहुँचे How To Reach Valley of Flowers

 

 वैली ऑफ फ्लावर्स उत्तराखंड के अधिकाँश शहरों से अच्छी तरह जुदा हुआ है | सड़क मार्ग ,रेल मार्ग और हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है |

 

4.1 रेल मार्ग से वैली ऑफ फ्लावर्स कैसे पहुँचे: How To Reach Valley of Flowers By Train

                  वैली ऑफ फ्लावर्स तक पहुँचने के लिए रेल मार्ग की कोई सीधी कनेक्टिविटी नहीं है | यहाँ का सबसे नजदीकी स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश भारत के बड़े शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है | यहां से आप बस या टैक्सी द्वारासड़क मार्ग से गोविंद घाट तक पहुंच सकते हैं | ऋषिकेश से गोविंद घाट की दूरी 273 किलोमीटर है | गोविंद घाट से 16 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करना पड़ता है | घांघरिया वेली ऑफ़ फ्लावर्स का बेस कैंप है ,यहां पहुंचकर आप होटल में ठहर सकते हैं |

 

4.2 हवाई मार्ग से वैली ऑफ फ्लावर्स कैसे पहुँचे: How To Reach Valley of Flowers By Airplan

                  वैली ऑफ फ्लावर्स का निकटतम एयरपोर्ट देहरादून है, जो कि भारत के बड़े शहरों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है | यहाँ से सड़क मार्ग से आगे की यात्रा कर गोविंद घाट पहुंचा जा सकता है | एयरपोर्ट से गोविंद घाट की दूरी 292 किलोमीटर है | गोविंद घाट से वेली ऑफ फ्लावर्स पहुंचने के लिए16 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करना पड़ता है।

 

4.3 सड़क मार्ग से वैली ऑफ फ्लावर्स कैसे पहुँचे:How To Reach Valley of Flowers By Road

                सड़क मार्ग से वैली ऑफ फ्लावर्स पहुँचने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून से जोशीमठ बसें/टैक्सी के द्वारा पहुंचा जा सकता है। जोशीमठ से गोविंदघाट तक रोड अच्छी तरह बना हुआ है और वहाँ से 16 किलोमीटर की ट्रेकिंग कर  वैली ऑफ फ्लावर्स पहुंचा जा सकता है।

 

5. वैली ऑफ फ्लावर्स में कहाँ ठहरें Where to stay in Valley of Flowers

 

                   वैली ऑफ़ फ्लावर्स में पहनने की अनुमति नहीं है | घांघरिया ,गोविंद घाट और जोशीमठ में सभी बजट के अनुसार ठहरने की सुविधा उपलब्ध है | घांघरिया वैली ऑफ फ्लावर्स का बेस केंम्प है | आपको यहाँ बेसिक गेस्ट हाउस और टेंट उपलब्ध हो जाएँगे  – GMVN गेस्ट हाउस, Camp Valley, Hotel Kuber

जोशीमठ में भी बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हैं जैसे The Tattva, Himalayan Abode, Hotel Dronagiri

 

6. वैली ऑफ़ फ्लावर्स का यात्रा बजट Valley of Flowers Travel Budget

 

ट्रांसपोर्ट 

हरिद्वार से गोविंदघाट तक ₹1000-₹1500  (बस/शेयर टैक्सी) दोनों तरफ का 

गोविन्द घाट से घांघरिया तक ₹ 100 शेयर टेक्सी दोनों तरफ का 

स्टे : 

गोविन्द घाट और घांघरिया में गुरुद्वारा में फ्री ठहर सकते हैं 

होटल :

₹500–₹3000 प्रति रात (श्रेणी अनुसार)

खाना:

गोविन्द घात और घांघरिया में खाना ₹200–₹500 में मिल जाएगा और इसके आलावा लंगर में फ्री खाने की भी सुविधा होती है |

ट्रेकिंग परमिट: ₹200

गाइड का चार्ज अलग से होता है |

 कुल 4-5 दिन की यात्रा करने पर ₹6000–₹12000 का खर्च आता है।

 

7. वैली ऑफ़ फ्लावर्स का फेमस फूड Famous food of Valley of Flowers

              वैली ऑफ़ फ्लावर्स में किसी भी प्रकार की भोजन की व्यवस्था नहीं है ,पर्यटकों को अपने साथ खाना और पानी ले जाना चाहिए |घांघरिया जो की बेस केम्प है ,वहां कुछ होटल हैं जहाँ आपको सभी प्रकार का भोजन जैसे की दाल ,चावल ,रोटी ,सब्ज़ी ,छोले भठूरे ,लस्सी ,राजमा ,चाउमीन ,मोमोज़ मंदुए की रोटी ,फानू  आदि उपलब्ध हो जाएगा |

 

8. वैली ऑफ़ फ्लावर्स का ️लोकल मार्केट ️Local Market of Valley of Flowers

 

जोशीमठ बाजार में मिलने वाली मुख्य वस्तुएं ऊनी कपड़े, हैंडीक्राफ्ट, पूजा सामग्री आदि हैं |

घांघरिया स्ट्रीट शॉप्स – यहाँ ट्रेकिंग गियर, रेनकोट्स, स्टिक्स, लोकल हर्बल दवाएँ आदि सामग्री उपलब्ध हैं |

 

  9. निष्कर्ष Conclusion

 

                मानसून में वैली ऑफ फ्लावर्स की यात्रा पर्यटकों एक उमंग सी भर देता है | यहाँ ट्रेकिंग करना जीवन भर की स्मृति बन जाती है। यह जगह प्राकृतिक सुन्दरता और शांति का प्रतीक है | यहाँ रंग बरंगे अद्भुत फूल एक अलग ही  दुनिया में ले जाते हैं। एडवेंचर और ट्रेकिंग लवर हों या फोटोग्राफी के शौकीन, यह जगह इन लोगों के लिए स्वर्ग के समान है।

 

  FAQs

 

प्र. क्या मानसून में ट्रेक करना सुरक्षित है?

उत्तर: हाँ, लेकिन बारिश के कारण पथरीले रास्तों पर फिसलन होती है, अच्छे ट्रेकिंग शूज़ पहनना जरूरी है।

 

प्र. क्या बुजुर्ग लोग ट्रेक कर सकते हैं?

उत्तर: यदि स्वास्थ्य ठीक है और चलने की क्षमता है तो हाँ, लेकिन डॉक्टर की सलाह लें।

 

प्र. क्या वहाँ मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध है?

उत्तर: जोशीमठ तक नेटवर्क है, घांघरिया और आगे कमज़ोर या नहीं रहता।

 

प्र. क्या बच्चों के साथ जाना सुरक्षित है?

उत्तर: हाँ, लेकिन छोटे बच्चों के लिए ट्रेक थोड़ा कठिन हो सकता है।

 

प्र. क्या ऑनलाइन परमिट लिया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, उत्तराखंड ईको टूरिज्म की वेबसाइट पर परमिट बुक किया जा सकता है।

 

 


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